मार्च में लगातार बारिश क्यों? IMD ने बताया पूरा कारण, अप्रैल में भी ठंड का असर जारी रहेगा | Weather Update 2026

Weather Update 2026 – भारत में मार्च के महीने में मौसम की स्थिति इस बार सामान्य पैटर्न से काफी अलग देखने को मिल रही है। मार्च के पहले दो हफ्तों में कई हिस्सों में लगातार बारिश, हल्की बर्फ़बारी और तापमान में गिरावट ने मौसम विभाग (IMD) को भी आश्चर्य में डाल दिया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आम तौर पर मार्च में गर्मी की शुरुआत होती है और बारिश कम हो जाती है, लेकिन 2026 में मौसम की दिशा कुछ अलग बनी हुई है।

सबसे बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) का इस वर्ष मार्च में भी सक्रिय रहना है। पश्चिमी विक्षोभ सामान्यतः सर्दियों के महीने जनवरी और फरवरी में सक्रिय रहते हैं, लेकिन इस साल यह प्रणाली मार्च में भी लगातार सक्रिय रही, जिसका असर बारिश और तापमान पर साफ़ दिखाई दे रहा है।

पश्चिमी विक्षोभ क्यों रह रहे हैं सक्रिय?

पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवा में चलने वाली एक मौसम प्रणाली होती है, जो अरब सागर से ऊर्जा और नमी लेकर पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ती है। यह पश्चिमी हिमालय और उत्तरी भारत से गुजरते समय बारिश, ओलावृष्टि, और तेज हवाओं का कारण बनती है। इस साल मार्च में जिस प्रकार लगातार विक्षोभ सक्रिय हुए हैं, उससे मौसम सामान्य से अधिक अस्थिर बना हुआ है।

IMD द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, 16 मार्च के आसपास एक या दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभों ने उत्तरी भारत, पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्र में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना को बढ़ा दिया। इन विक्षोभों के कारण ऊँचे और निचले वायुमंडलीय दबावों में असंतुलन बना, जिससे मार्च में भी बारिश की गतिविधियाँ सामान्य से अधिक देखी गईं।

आतिरिक्त नमी का प्रभाव

मार्च के माह में जब पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होते हैं, तो यह नमी को अपने साथ लेकर चलते हैं। इस नमी का स्रोत मुख्यतः अरब सागर और बंगाल की खाड़ी होती है। जब पश्चिमी विक्षोभ इन महासागरों से नमी खींचते हैं और इसे उत्तर भारत की ओर ले जाते हैं, तो बादल बनते हैं और वर्षा का सिलसिला शुरु होता है।

कुछ मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार नमी का सामान्य से अधिक प्रवाह होने का कारण ऊष्मीय असंतुलन (Thermal imbalance) है, जिससे हवाओं के मार्गों में बदलाव आया है और बारिश की गतिविधियाँ देर तक जारी हैं। हालांकि ऐसा हर साल नहीं होता, लेकिन इस बार पिछले कई दिनों से लगातार मौसम विभाग के पूर्वानुमान में बार-बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की चेतावनी शामिल रही है।

IMD का मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियाँ

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मार्च के बीच कई बारAlerts जारी किए हैं, जिसमें कुछ हिस्सों में तेज़ बारिश, आंधी-तूफ़ान और ओलावृष्टि की चेतावनी भी दी गई है। आज, 24 मार्च को भी IMD ने उत्तर भारत, पूर्वोत्तर और मध्य भारत के कई इलाकों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।

उत्तर भारत के कई हिस्सों में तेज़ हवाएँ (लगभग 70 किमी/घंटा की रफ्तार तक) के साथ गरज और बारिश की संभावना मौसम विभाग ने जताई है, जिससे तापमान में गिरावट बनी हुई है। इसे देखते हुए IMD ने लोगों को सतर्क रहने और खासकर खुले इलाकों में जोखिम भरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी है।

मार्च में बारिश के कारणों को कैसे समझें?

आइए समझते हैं सरल भाषा में कि आखिर मौसम विभाग IMD इस बार मार्च में लगातार बारिश के लिए क्या कह रहा है:

  1. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) – यह साल की सामान्य प्रवृत्ति से लंबा चल रहा है और लगातार नमी लेकर उत्तर भारत की ओर आ रहा है।
  2. ऊपर वायुमंडलीय दबाव में अस्थिरता – विक्षोभों के कारण ऊपरी हवा में दबाव असंतुलित होता है, जिससे नमी के मिलने पर बादल और बारिश होती है।
  3. समुद्री नमी का समावेश – अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की नमी जो पश्चिमी विक्षोभों द्वारा उत्तरी भारत तक लायी जा रही है, बारिश को अधिक सक्षम बना रही है।
  4. तापमान वितरण का असामान्य माहौल – मार्च में सामान्यतः गर्मी बढ़ती है, लेकिन इस बार तापमान कई बार सामान्य से नीचे चला गया है, जिसका मुख्य कारण लगातार सक्रिय विक्षोभ और नमी का असर बताया जा रहा है।

क्या अप्रैल में भी ठंड का असर रहेगा?

IMD और मौसम विशेषज्ञों ने संकेत दिए हैं कि अप्रैल के शुरुआती दिनों में भी ठंड और बारिश जैसी स्थिति का प्रभाव थोड़ा-बहुत अनुभव किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मार्च की सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ प्रणाली अप्रैल के पहले सप्ताह में भी अपने प्रभाव को बनाए रखने की संभावना दिखा रही है, जिससे तापमान सामान्य से नीचे बना रह सकता है और मौसम अधिक सुहावना रहेगा।

कुछ पूर्वानुमानों के अनुसार, अप्रैल के पहले हफ्ते में भी मौसम में हल्की बारिश, गरज और आंधी के साथ तापमान में कमी देखी जा सकती है, खासकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों और पहाड़ियों में। यह स्थिति मौसम के सुस्त होने और पश्चिमी विक्षोभों के सक्रिय बने रहने की वजह से हो सकती है।

खेती और कृषि पर असर

मार्च के महीने में लगातार बारिश का मौसम कई किसानों के लिए राहत तो दे रहा है लेकिन कुछ फसलों के लिए चिंता का विषय भी बन रहा है। गेहूँ और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए सामान्यतः मॉइस्चर (नमी) अच्छा होता है, लेकिन बिना रुके बारिश से मिट्टी में अधिक पानी जमा होने की समस्या हो सकती है, जो फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।

इसके अलावा अप्रैल में तापमान का सामान्य से नीचे रहना भी खेती के कल्चरल चक्र को प्रभावित कर सकता है और कुछ फसलों की पैदावार पर असर डाल सकता है।

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